ट्रम्प की इस मांग से ज़्यादा हैरत अंगेज़ प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी का जवाब था जिन्होंने कहा कि हम अमरीका की कई तेल कंपनियों के साथ व्यापक रूप से सहयोग कर रहे हैं जिनके इराक़ में बड़े हित हैं। उनका तात्पर्य यह था कि इराक़ के पास हज़ारों अरब डालर की संपत्ति तेल भंडारों के रूप में मौजूद है और इससे अमरीका की कमाई हो सकती है।
हमें अपेक्षा यह थी कि हैदर अलएबादी यह जवाब देने के बजाए ख़ुद ट्रम्प से हर्जाना मांगते कि अमरीका ने इराक़ की नाकाबंदी करके इराक़ को हज़ारों अरब डालर का नुक़सान पहुंचाया और बारह साल तक जारी रहने वाली इस नाकाबंदी के कारण दस लाख से अधिक इराक़ी बच्चे मौत के मुंह में समा गए। वर्ष 1991 में अमरीकी बमबारी के कारण इराक़ की मूल संरचनाएं ध्वस्त हो गईं जबकि वर्ष 2003 में अमरीकी हमले और क़ब्ज़े के नतीजे में भी दस लाख इराक़ी मारे गए। यह आंकड़े अंतर्राष्ट्रीय मेडिकल मैगज़ीन लानसेट ने दिए हैं।
वैसे ट्रम्प की इस निरलज्जता पर हमें हैदर अलएबादी के ढीले जवाब पर ज़्यादा ताज्जुब नहीं करना चाहिए क्योंकि वह सत्ता में बने रहने के लिए अमरीका का समर्थन चाहते थे और यह बात तब और साफ़ हो गई जब उन्होंने बयान दाग़ दिया कि ईरान पर अमरीकी प्रतिबंधों का इराक़ भी पालन करेगा। इस पर इराक़ के भीतर और बाहर उनको जमकर लताड़ा गया और सत्ता भी चली गई।
अमरीकी वेबसाइट एक्सियस ने जिसने ट्रम्प और एबादी के बीच होने वाली इस बातचीत का ख़ुलासा किया है, यह भी बताया है कि पूर्व अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हरबर्ट मैकमास्टर ने जिन्हें ट्रम्प ने इस पद से हटा दिया, ट्रम्प की इस मांग को अमरीका की छवि के लिए बहुत हानिकारक बताया जबकि अमरीकी युद्ध मंत्री जेम्ज़ मैटिस ने कहा कि यह मांग अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है। शायद मैकमास्टर का यही विरोध उनकी बर्खास्तगी का कारण बना है और यह भी संभावना है कि इसकी क़ीमत जेम्ज़ मैटिस को भी चुकानी पड़े जिसके कुछ और भी कारण हैं।
दो साल पहले राष्ट्रपति चुनाव के कैंपेन के दौरान ट्रम्प ने शिकायत की थी कि अमरीका ने कई हज़ार अरब डालर की रक़म ख़र्च कर दी और हज़ारों अमरीकी सैनिक मारे गए ( मरने वाले अमरीकी लगभग 4 हज़ार और घायल 30 हज़ार) जबकि इसके बदले में अमरीका को कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने अमरीकी सरकारों की आलोचना भी की कि उन्होंने इराक़ के तेल के कुओं को अगले कई दशकों के लिए अपने क़ब्ज़े में क्यों नहीं कर लिया? इसी लिए उन्होंने शायद हैदर अलएबादी से इराक़ की तेल की आमदनी में हिस्सा मांगा था।
अमरीकी कंपनियों को इराक़ में 30 साल तक तेल के कुओं से तेल निकालने और नए कुएं खोजने का ठेका मिल गया है जिसका श्रेय पाल ब्रेमर के ज़माने में इराक़ के तेल मंत्री हुसैन शहरिस्तानी को देना चाहिए। मगर एसा लगता है कि इतनी बड़ी क़ीमत भी ट्रम्प की भूख नहीं मिटा सकी और शायद हैदर अलएबादी यदि सत्ता में बने रह जाते तो ट्रम्प पूरा किया किसी हद तक यह हर्जाना भी हासिल कर लेते।
बाब वुडवर्ड ने जिन्होंने फ़ियर.... ट्रम्प इन द वाइट हाउस नामक पुस्तक लिखी है यह रहस्योदघाटन किया कि ट्रम्प ने अपने सलाहकारों से कहा था कि वह अफ़ग़ानिस्तान में सोने, चांदी, यूरेनियम जैसी क़ीमती खदानों की खोज करें ताकि अफ़ग़ान युद्ध पर अमरीका की जो रक़म ख़र्च हुई है वह वापस ली जा सके मगर उनकी इस मांग का मज़ाक़ इसलिए उड़ाया गया कि अफ़ग़ानिस्तान के एक बड़े भाग पर तालेबान का क़ब्ज़ा हो गया है और देश में सुरक्षा स्थिति बहुत ख़राब है।
हर्जाने की मांग तो इराक़ियों को करना चाहिए क्योंकि अमरीका ने उनका देश पर हमला किया और क़ब्ज़ा करके उसे भारी नुक़सान पहुंचाया। हमें इराक़ी राष्ट्र पर पूरा भरोसा है जिसने अमरीका का कब्ज़ा हो जाने बाद अमरीकी सैनिकों को बुरी तरह परास्त किया और इस देश से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। इराक़ी राष्ट्र अमरीकी वर्चस्ववाद को बुरी तरह ठुकरा देगी और इराक़ को उस स्थान पर पहुंचाएगी जो इस देश का अधिकार है।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार